shabar mantra tantra and time


शाबर मंत्र व तंत्र विज्ञान के बारे में अक्सर लोग जानने व सीखने के इच्छुक होते हैं लेकिन तंत्र साधनायें तथा उनके नियम विशाल हैं | तंत्र को सीखना इतना आसान नही है और शाबर मंत्र साधना में १२ (बारह) वर्ष की गुरू सेवा के पश्चात ही दीक्षा का विधान है | इन बारह वर्षों के दौरान गुरू चाहे तो उसे स्वेच्छा से पहले भी दीक्षा दे सकता है | लेकिन आमतौर पर ऐसा नही होता| असल में इन १२ वर्षों में शिष्य, गुरू के सानिध्य में रहकर तंत्र के नियम व प्राकृतिक शक्तियों को समझता है|  ये बारह वर्ष बेहद अहम हैं और गुप्त तंत्र विद्या का एक हिस्सा हैं | इनमे भी साधक, गुरू की सेवा करता हुआ ज्ञान प्राप्त करता चला जाता है| उसे तंत्र मंत्र व परमात्मा की असीम ताक़त और कुदरत समझ में आने लगती है| 

हर तंत्र मंत्र जादू टोने का सम्बन्ध किसी ना किसी दैविक शक्ति के साथ होता है और शक्तियां दो तरह की होती हैं| अच्छी और बुरी |  अच्छी शक्तियां धर्म और पुण्य कर्म को बढ़ाती हैं जबकि बुरी शक्तियां अधर्म, अत्याचार और नीच कर्मों की माया को बढ़ाती हैं| अच्छी और बुरी ताक़तों के इस खेल को ही सृष्टि की माया कहा जाता है| माया के बिना दुनिया नहीं चलती| माया से ही यह संसार और सम्पूर्ण सृष्टि गतिमान होती है और माया अनेक रूपो में व्याप्त होकर अनेक दैविक ताकतों के आधीन है| इसे ही महामाया कहते हैं| महामाया की शक्ति से ही सबकी अच्छी या बुरी इच्छाएं पूर्ण होती हैं| मोह के कारण जीवात्मायें विभिन्न प्रकार के अच्छे-बुरे कर्मों में फंसी होती हैं| 

मोह के बिना मानव जीवन नहीं चलता| मोह के कारण ही कोई किसी का भला करता है तो कोई किसी का बुरा करता है| अच्छाई-बुराई का यह खेल सदा ऐसे ही चलता रहता है| 

इनमें सबसे बलवान है - समय | जब-जब, जिस-जिसका समय होता है, तब-तब उसी की जीत होती है| उसे कोई नहीं हरा सकता क्योंकि समय को कोई नही हरा सकता| आपके अच्छे समय में आपकी जीत और बुरे समय में आपकी हार होती है| याद रखिये कि जब अच्छाई का समय अच्छा होता है, तब वो विजयी होती है और जब उसका समय बुरा हो तो वो हार जाती है| इसी प्रकार जब बुराई का समय अच्छा होता है तो वो भी जीत जाती है और जब उसका भी बुरा समय होता है तो वह भी हार जाती है| वास्तव में सदा समय की जीत होती है| समय ही सबको हराता है और समय ही सबको जिताता है| अतः जो समय पर शासन करता है वह सदा विजयी है|           

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